देवगढ़ रियासत के दीवान सुजान सिंह वृद्ध हो चले थे। वह अपना पद छोड़ देना चाहते थे। उन्होंने अगले दिन रियासत के प्रमुख समाचार पत्रों में विज्ञापन निकाला कि देवगढ़ के लिए एक सुयोग्य दीवान की आवश्यकता है। लेकिन यह शर्त रखी कि दीवान पढ़ा लिखा हो, स्वस्थ हो और उसके विचार अच्छे हो। इन गुणों से संपन्न व्यक्ति ही दीवान पद पर रखा जाएगा। विज्ञापन को पढ़कर दूर-दूर से व्यक्ति अपने भाग्य की परीक्षा देने आने लगे। सुजान सिंह ने एक माह तक उनकी परीक्षा लेने हेतु उनके ठहरने का बंदोबस्त करवाया। सभी उम्मीदवार अपने दोषों को छिपाकर गुणों का प्रदर्शन करने की कोशिश में लगे हुए थे। दीवान सुजान सिंह बूढ़े जौहरी के समान गुप्त रूप से सभी उम्मीदवारों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे। अंत में उन्हें देवगढ़ रियासत के लिए पंडित जानकी नाथ के रूप में दयालु, उदार और आत्मविश्वास से परिपूर्ण दीवान मिल ही गया।

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