मोहित को भोजन से बड़ा प्यार था। वह कुछ भी ठूँसकर खा जाता था। जब वह सारे चुपड़े पराठे ढेर सारे मक्खन के साथ मुंह में डालता तो उसकी मां मुस्कुराती थी लेकिन मोहित की बहन मीता अधिक नहीं खाती थी। जब उनकी मां उन्हें फास्ट फूड के रेस्तरां में ले जाती तो मोहित पिज्जा, बर्गर और फ्रेंच फ्राइज की दावत उड़ाता। उसके बाद वह कभी एक आइसक्रीम खाता या कभी दो! किंतु मीता अपने पहले ही बर्गर को कठिनता से निपटा रही होती। माँ सोचती, "काश मीता भी मोहित की भाँति खाती होती।" एक दिन मोहित बहुत बीमार पड़ गया। जब डॉक्टर ने मोहित से पूछा कि तुमने क्या खाया, मोहित की मां ने बड़े गर्व से कहा, "मेरा बेटा तो जो भी मैं उसके सामने रखती हूं उसे खा जाता है।" यह सुनकर कि उसने क्या-क्या खाया डॉक्टर चकित हो गया। डॉक्टर ने उसका ध्यान पूर्वक परीक्षण किया और कहा, "मोहित जो खाता है, वह सब चीजें ठीक नहीं है।" उसने मोहित की मां से कहा, "उसे बहुत से ताजे फल, हरी सब्जियां और अनाज दीजिए। कोई कैंडी, टॉफी या चॉकलेट ना दे। उसके दांत देखिए! सब में कीड़े लग चुके हैं।"

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