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गद्यांश 45 बुद्धि और मस्तिष्क की शक्ति

 मनुष्य जब पहली बार पृथ्वी पर प्रकट हुआ तब वह अनेक विशालकाय जानवरों से घिरा हुआ था और उनसे भयभीत रहता था। आज मनुष्य जानवरों का स्वामी है और उनसे जो चाहे करवा सकता है। उसको वह पालतू बना लेता है, जैसे- घोडा, गाय, हाथी, कुत्ता, बिल्ली तथा ऐसे कई और। कुछ को वह खाता है और सिंह तथा शेर जैसे कुछ जानवरों को वह अपने मजे के लिए शिकार करता है। किंतु उन दिनों में मनुष्य स्वामी नहीं था, वह तो बेचारा स्वयं ही एक सताया हुआ जीव था और अपने आपको विशाल पशुओं से दूर रखने का प्रयत्न करता था। धीरे-धीरे उसने अपना विकास किया और उत्तरोत्तर शक्तिशाली बनता गया, परंतु शारीरिक बल के दम पर नहीं, क्योंकि हाथी उससे कहीं अधिक बलवान है। यह बुद्धि और मस्तिष्क की शक्ति द्वारा संभव हुआ।

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